इलेक्ट्रिक कारों का उपयोग करने के लिए तैयार हैं भारतीय

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जालंधर : इलेक्ट्रिक कारों के चाहने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है। इससे यह इशारा मिलता है कि भारतीय डीजल व पेट्रोल से चलने वाली कारों की बजाएं इलेक्ट्रिक कारों के लिए तैयार हो चुके हैं। 2020 तक भारत में एमिशन के मापदंड और भी सख्त हो जाएंगे, जिसके चलते पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होना लाजिमी है। ऐसे में लोग इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे वैकल्पिक माध्यम पर स्विच करेंगे।

भारत में आएगी टेस्ला -

फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट करने से संबंधित नीतियों पर सरकार का जोर है। टेस्ला ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिहाज से अच्छे प्रॉडक्ट उतारे हैं। यह कंपनी भारत में जून तक दस्तक दे सकती है। 

इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनियों की शिकायत -

इसके अलावा भारत में लिथियम बैटरी का महंगा होना एक अवरोधक साबित होता आया है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। वजह यह है कि 2011 के मुकाबले 2020 तक इसकी कीमत में एक तिहाई तक की कटौती होने की संभावना है। इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनियों की शिकायत है कि भारत में पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नहीं है। इसके चलते लोग पेट्रोल या डीजल कार पर ही भरोसा करना उचित समझते हैं। ऐसे में अगर सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देगी तो यह काफी लाभदायक साबित होगा।