कंपनियों के लिए सिरदर्द बन सकती है एप्पल ‘Airpod’ की रिसाइकलिंग

Punjab Kesari

जालंधरः पर्यावरण के प्रति जागरुक छवि बनाने में जुटी अमरीकी बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल का नया वायरलेस हेडफोन ‘एयरपॉड’ रिसाइकलिंग करने वाली कंपनियों के लिए सिरदर्द बन सकता है। इस वायरलेस हेडफोन के कल - पुर्जों की समीक्षा करने वाली कंपनियों में शामिल एक इलेक्ट्रॉनिक फर्म आईफिक्सईट के अनुसार एप्पल का नया चार ग्राम का वायरलेस हेडफोन‘एयरपॉड’के साथ छोटी लिथियम बैट्रीज जुड़ी हैं और इन्हीं की वजह से इसकी रिसाइकलिंग मुश्किल है। आईफिक्सईट ने पहले भी कई एप्पल उत्पादों की समीक्षा की है।   

एप्पल पर पहले भी ऐसे आरोप लगे हैं कि वह अपने उपकरणों को ऐसे बनाती है कि रिसाइकलिंग के लिए कम लागत में उसके पुर्जों को अलग अलग करना मुश्किल होता है। इन्हीं आरोपों के बाद कंपनी ने अपनी छवि सुधार के लिए पर्यावरण के प्रति अपनी जागरुकता का प्रचार करना शुरु किया था।  

आईफिक्सईट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी काइल वीन्स ने कहा कि एप्पल अपने नये उत्पाद को भविष्य का हेडफोन कहकर प्रचारित कर रही है। उनके अनुसार एप्पल ने 1.4 अरब आईफोन और आईपॉड हेडफोन की बिक्री की होगी, जिनका वजन लगभग तीन करोड़ 10 लाख पाउंड होगा। आने वाले समय में एयरपॉड का इस्तेमाल इसी तरह बढऩे का अनुमान है। एप्पल ने कहा है कि 1569 डॉलर का यह एयरपॉड रिसाइकलिंग के लिए कंपनी को लौटाया जा सकता है। 

कंपनी के प्रवक्ता ने रिसाइकलिंग के मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।  एप्पल ने गत सप्ताह ही एयरपॉड जारी किये हैं। एयरपॉड में तीन लिथियम आयन बैट्रीज हैं जिनमें से एक-एक पॉड में और एक चार्जिंग केस में है। रिसाइकलिंग करने वाली कंपनियां वायर्ड हेडफोन को तोड़कर स्मेल्टर में भेज देती हैं,जहां उनमें मौजूद तांबा पिघल जाता है लेकिन लिथियम आयन बैट्री को तोडा नहीं जा सकता है क्योंकि ऐसा करने पर उनमें आग लग सकती है। अगर हर एयरपॉड से पहले लिथियम बैट्री को अलग किया जाये तो इसकी रिसाइकलिंग बहुत महंगी हो जाएगी।