वैज्ञानिकों ने रॉकेट तकनीक का इस्तेमाल कर बनाया कृत्रिम हृदय: रिपोर्ट

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Friday, March 16, 2018-7:02 PM

जालंधर- चीन की एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी (सीएएलटी) और उत्तरी चाइना के तियानजिन में टेडा इंटरनेशनल कार्डियोवास्कुलर हॉस्पिटल द्वारा संयुक्त रूप से एक कृत्रिम हृदय विकसित किया है। वैज्ञानिकों ने इस कृत्रिम हृदय को विकसित करने के लिए रॉकेट तकनीक का उपयोग किया है। ‘एयरोस्पेस हर्ट’ नाम के इस कृत्रिम हृदय को 13 वीं पंचवर्षीय योजना (2016-20) के दौरान क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजे जाने की उम्मीद है। वहीं अभी तक केवल जानवरों पर ही इसका प्रयोग किया गया है।

 

सीएएलटी के पूर्व निदेशक ली हांग ने कहा कि जानवरों पर परीक्षण किए जाने के बाद कृत्रिम हृदय को जांच के लिए भेज दिया गया है। कृत्रिम हृदय, रॉकेट प्रणाली से चुंबकीय और तरल उत्तोलन का उपयोग करता है। इस तकनीक का इस्तेमाल करके खून को होने वाली क्षति को कम किए जाने के साथ ब्लड पंप को लंबे समय तक काम करने के लिए सक्षम बनाया जा सकता है।

 

इसके अलावा एक सैन्य विशेषज्ञ और टीवी कमेंटेटर सांग झोंगपिंग ने रिपोर्ट में कहा कि चुंबकीय और तरल पदार्थ उत्तोलन तकनीक कार्य कुशलता को बढ़ाने के लिए घर्षण को कम कर सकता है। बता दें कि वर्ष 2013 में वैज्ञानिकों ने एक भेड़ में मानव का हृदय लगाया था, जो कि 120 दिनों तक जीवित रहा था। वहीं ‘एयरोस्पेस हर्ट’ चीन में बनाया गया पहला कृत्रिम हृदय है। उम्मीद की जा रही है कि अाने वाले समय में इस तकनीक पर और काम किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में अधिक विकास होगा। 

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