अब इस मालवेयर के निशाने पर हैं लाखों एंड्रायड डिवाइस

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जालंधरः जालंधरः चेकप्वाइंट सिक्योरिटी फर्म से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले साल पूरी दुनिया में एंड्रॉयड मालवेयर हमिंगबैड ने 1 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन को प्रभावित किया था। इस मालवेयर के जरिए फेक डेवलपर्स ने एक महीने में लगभग 300,000 डालर कमाए थे। आपको बता दें कि इस साल के शुरूआत में ही हमिंगव्हेल मालवेयर को पाया गया है जो गूगल प्ले स्टोर मे करीब 20 एप्स में मौजूद हैं। गूगल सिक्योरिटी टीम द्वारा इन एप्स डिलीट करने से पहले ही करीब 12 मिलियन लोगों ने इन्हें डाउनलोड कर लिया है। 

जानिए क्या है हमिंगव्हेल मालवेयर

आपको बता दें कि हमिंगव्हेल मालवेयर ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जो गलत सॉफ्टवेयर के जरिए फ्रॉड एड के संचालन करने की अनुमति देती है। इससे ये मालवेयर अपने डेवलपर के लिए रेवन्यू बनाता है। रिसर्चर्स के मुताबिक, हमिंगव्हेल

इंफेक्टेड एप्स फेक चाइनीज डेवलपर्स द्वारा पब्लिश किया गया है। फेक डेवलपर्स  इन एप्स का नाम इतना कॉमन रखते हैं कि जिससे यूजर्स को किसी तरह का शक न हो। यह मालवेयर पिछले साल सामने आए हमिंगबैड से भी ज्यादा खतरनाक है। यह वायरस, APK फाइल के रुप में काम करता है और स्मार्टफोन में दूसरी एप्स को इंस्टॉल कर ऑटोमेटकिली रन करता है।

आपको बता दें कि यह ड्रॉपर एक ड्रायड प्लग-इन (DroidPlugin) को इस्तेमाल करता है, जो चाइनीज सिक्योरिटी वेंडर Qihoo 360 ने बनाया है। यह प्लगइन वर्चुअल मशीन में मालवेयर एप्स को अपलोड करने का काम करती है। यह बिना यूजर को पता चले फोन में कई एप्स को डाउनलोड कर देती है, जो हमिंगव्हेल मालवेयर मालवेयर से इंफेक्टेड होता है। इससे यूजर के फोन की इंटरनल मेमोरी पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।अगर यह मालवेयर यूजर के फोन में आ जाता है, तो कमांड एंड कंट्रोल यानि C&C सर्विर यूजर को फेक एड्स भेजता है। जो वर्चुअल मशीन पर कार्य करते हैं।