इन एप्स के जरिए आपके स्वास्थ की सुरक्षा करेगा स्मार्टफोन

Punjab Kesari

जालंधरः स्मार्टफोन अब हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका हैं, जिसके बिना जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती। हम लोग स्मार्टफोन का प्रयोग चैट, कॉलिंग आदि के लिए करते हैं। लेकिन लंदन में रहने वाले 1.2 मिलियन से ज्यादा लोगों को रोग निदान के लिए बेबीलोन- आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस (ए.आई.) एप्प देने की पेशकश की गई। इस एप्प से स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मरीज की जेब में मौजूद रहेगी।

बेबीलोन: 

इस नि:शुल्क एप्प से मरीज लाइव वीडियो चैट के माध्यम से डाक्टर से बात कर सकता है।

लक्षण की जांच करना: 

संसार में कहीं से भी इस फीचर द्वारा स्वचालित निदान प्राप्त किया जा सकता है। गंभीर रोगों के लिए यह सटीक व्यवस्था है।

आई एग्जामिनर: 

हाथ से पकड़ा जाने वाला यह आईफोन ऑप्थैल्मोस्कोप (नेत्रदर्शक) हाई रैजोल्यूशन वाले फोटो लेने के लिए कैमरे का इस्तेमाल करता है। परंपरागत ऑप्थैल्मोस्कोप की तुलना में यह दृश्यों को 3 गुना बड़ा दिखाता है। साथ ही इसमें आंखों की पुतली को फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह विशेषज्ञों के पास दूर-दराज के इलाकों से भी फोटो व विवरण भेज देता है।

स्पाइरो स्मार्ट: 

दमा, सिस्टिक फाइब्रोसिस व ब्रोन्काइटिस जैसी दीर्घकालीन बीमारियों को मॉनीटर करने के लिए यह एप माइक्रोफोन को स्मार्टफोन आधारित स्पाइरोमीटर के रूप में प्रयुक्त करता है। यह एप्प मरीज के मुंह के रास्ते व श्वास नली से आने वाली ध्वनि तरंगों का विश्लेषण करता है।

पूप एमडी: 

यह नि:शुल्क एप पित्त अविवरता (बिलैरी एटरेशिया-बी.ए.) को पहचानने के लिए पाखाने के रंग की जांच करता है। यह एक ऐसा विकार है जो बच्चों के लिवर में रोग का कारण बनता है।

कार्डिया मोबाइल: 

रक्तचाप मॉनीटर व इलैक्ट्रोकार्डियोग्राम उच्च रक्तचाप (हाइपरटैंशन) और तंतु विक्सन (आट्रियल फिब्रिलेशन ए.एफ.) को मरीज की उंगलियों के निशान  से खोज लेता है। फिर यह डाक्टर को आंकड़े जारी कर देता है। ए.एफ. उन मरीजों के साथ जुड़ा हुआ है जिनको 50 प्रतिशत से अधिक दिल के दौरे का खतरा होता है।

क्लीनिक्लाऊड: 

इसमें डिजीटल स्टैथोस्कोप व थर्मामीटर होता है। हर डाक्टर के क्लीनिक के ये दोनों अनिवार्य यंत्र हैं। ये दोनों फोन एप के साथ तापमान को रिकार्ड करने व उसका विश्लेषण करने का काम करते हैं तथा दिल की धड़कन व सांस लेने का अध्ययन करते हैं। इससे सीधे डाक्टर को आंकड़े भेजे जा सकते हैं।

बायोमेमे सिस्टम: 

यह आईफोन को मोबाइल (चलती-फिरती) डी.एन.ए. लैब में बदल देता है। हाथ से संचालित होने वाला यह रियल टाइम पी.सी.आर. (पॉलीमर्स चेन रिएक्शन) सिसलर है जो मरीज के खून के नमूने से पैथेजन के डी.एन.ए. की अरबों प्रतियां बना सकता है और फ्लोरेसैंट डाई से इसका टैग लगा देता है। आईफोन चमकती हुई डाई की जांच कर लेता है। इस बीच एप पहचान करता है कि नमूने में कौन-सा वायरस है।

लूमीफाई: 

फोन या एंड्रायड टैबलेट में फिलिप्स का अल्ट्रासाऊंड सिस्टम लगा दिया जाता है। स्कैनिंग एप्प के माध्यम से फेफड़ों, पेट, मांसपेशियों व हड्डियों और मुलायम ऊतकों की संरचना कीइमेज बन जाती है। तुरंत आवश्यकता पडऩे पर केयर सैंटरों पर यह एप अल्ट्रासाऊंड का काम करता है और विशेषज्ञ इसका अवलोकन करके अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट को सीधे अपनी रिपोर्ट भेज देता है।

2013-16 इबोला का प्रकोप: 

पश्चिमी अफ्रीका में इबोला वायरस के 28,600 से अधिक मामले सामने आए और 11,300 से अधिक लोगों की इससे मौत हो गई। इस वायरस की पहचान के लिए रियल टाइम पी.सी.आर. का इस्तेमाल किया गया लेकिन कुछ ही परीक्षण किए जा सके। एक उंगली से हल्का-सा दबाव बनाते ही बायोमेेने पी.सी.आर. किसी की भी 2 घंटे से कम समय में जांच कर सकता है।