इस कारण हो रही मीथेन गैस में वृद्धि

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पेरिस : कृषि और अन्य स्रोतों से हाल के वर्षों में वैश्विक मीथेन गैसों के उत्सर्जन में लगातार वृद्धि दर्ज की गयी है जिससे जलवायु परिवर्तन को कम करने के प्रयासों को धक्का पहुंचा है। जलवायु और पर्यावरण के फ्रेंच विज्ञान प्रयोगशाला (एल.एस.सी.ई.) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक रिपोर्ट जारी की गयी जिसमें कहा गया है कि वातावरण में मीथेन गैस की सांद्रता में वृद्धि वर्ष 2007 में प्रारंभ हुई जो वर्ष 2014 और 2015 में लगातार बढ़ रही है। पिछले 2 साल की अवधि में वायु में मीथेन गैस की सांद्रता वर्ष 2000 की 0.5 पाट्र्स पर बिलियन (पी.पी.बी.) की तुलना में 10 या इससे अधिक पाट्र्स पर बिलियन (पीपीबी) तक पहुंच गई है।   

इस शोध की प्रमुख लेखिका और वर्साय सेंट क्वेंटिन विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर मैरिले सोनोइस ने कहा कि मीथेन उत्सर्जन में वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने के प्रयासों को खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि हमें मीथेन गैस के उत्सर्जन को रोकने के लिए बहुत अधिक प्रयास करने चाहिए। यदि हम तापमान को 2 या इससे कम पर रोकना चाहते हैं तो हमें इस पर काम करना होगा और इस दिशा में तेजी से बदलाव करने की जरूरत होगी। 

मीथेन गैस वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड की तुलना में कम प्रचलित गैस है। यह सबसे बड़ा मानव निर्मित ग्रीन हाउस गैस है जो अधिक शक्तिशाली है और यह 28 गुना अधिक शक्तिशाली होता है। इस रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग में मीथेन गैस का योगदान कितना है।