शहरों में स्मॉग से लड़ेगा नया सिल्वर उत्प्रेरक!

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मास्को : हवा को स्वच्छ बनाने के लिए वैज्ञानिक सिल्वर का एक एेसा उत्प्रेरक बना रहे हैं, जो विषैली कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक पदार्थों को एेसे तत्वों में बदल सकता है, जो नुकसान न पहुंचाते हों। यह कदम नई दिल्ली और बीजिंग जैसे शहरों में स्मॉग से लडऩे में मददगार साबित हो सकता है।  

नैनो संरचना वाला यह उत्प्रेरक कमरे के तापमान पर भी कारगर साबित हो सकता है और इसका इस्तेमाल वायु-संचालन (वेंटीलेशन) में एक फिल्टर की तरह किया जा सकता है। रूस स्थित तोम्स्क स्टेट यूनिवर्सिटी की लेबोरेट्री ऑफ कैटेलेटिक रिसर्च में वरिष्ठ शोधकर्ता ग्रेगरी मेमोन्तोव ने कहा, ‘‘गोल्ड, प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी कीमती धातुओं के कणों से बने अन्य उत्प्रेरकों की तुलना में सिल्वर से बने उत्प्रेरकों का अध्ययन कम हुआ है।’’   

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि वे भी हानिकारक वाष्पशील पदार्थों के ऑक्सीकरण में उतने ही प्रभावी साबित हो सकते हैं और इनका खर्च भी 10वां हिस्सा होगा।’’  शोधकर्ताओं ने एक विशेष किस्म के सिलिका जेल- एसबीए-15 का निर्माण किया है, जिसमें 6-10 नैनोमीटर व्यास की सिल्वर ऑक्साइड की नैनोट्यूब हैं। 

मैमोन्तोव ने कहा, ‘‘हर नैनोट्यूब का इस्तेमाल नैनोस्केल रिएक्टर की तरह किया जाता है। इसके अंदर हम तीन नैनोमीटर से भी छोटे सिल्वर कणों और सीरियम ऑक्साइड के निर्माण का काम करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद कणों से युक्त हर नैनोट्यूब उत्प्रेरक बन जाती है। हमारा काम कणों को नैनो ट्यूबों के बीच वितरित करना और उनके बीच विशेष संपर्कों का प्रबंधन करना है। इससे हानिकारक पदार्थों के ऑक्सीकरण की प्रक्रिया में उच्च उत्प्रेरक हो सकेगा।’’  

उन्होंने कहा, ‘‘एेसा माना जाता है कि पाऊडर या दानों के रूप में प्राप्त किए गए उत्प्रेरक घरों, दफ्तरों आदि की हवा स्वच्छ करने वाले उपकरणों में लगाए जा सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसे गर्म करना भी जरूरी नहीं है क्योंकि यह उत्प्रेरक कमरे के तापमान पर सक्रिय और स्थिर होता है।’’