परमाणु कचरे में से रेडियोधर्मी तत्व ‘निकालने’ का नया तरीका

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जालंधर: वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि आर्सेनिक के अणुओं का इस्तेमाल रेडियोधर्मी परमाणु कचरे में से सबसे जहरीले तत्वों को ‘निकालने’ के लिए किया जा सकता है। यह एक एेसी उपलब्धि है, जो वैकल्पिक ऊर्जा उद्योग को सुरक्षित और अधिक प्रभावी बना सकती है।   

शोधकर्ताओं ने विशेष परिस्थितियों में बहुग्राम स्तर पर थोरियम के आर्सेनिक के साथ बहुबंधों के पहले उदाहरणों की जानकारी दी। इससे पहले उन्होंने अंतरातारकीय अंतरिक्ष के समान तापमान पर इसे एक बेहद छोटे स्तर पर तैयार किया था।  इस अध्ययन में यह जांच की गई कि नरम तत्व आर्सेनिक किस तरह से थोरियम के साथ अभिक्रिया करता है। क्योंकि आर्सेनिक सैद्धांतिक तौर पर एेसे कार्बनिक अणुओं में इस्तेमाल किया जा सकता है, जो धात्विक परमाणुओं को बांधते हैं और निष्कर्षण प्रक्रिया को सुधारते हैं।  

ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय की एलिजाबेथ वाइल्डमैन ने कहा, ‘‘परमाणु ऊर्जा में यह क्षमता है कि वह जीवाश्म ईंधनों की तुलना में कहीं कम कार्बन डाइ ऑक्साइड पैदा करती है। लेकिन जो दीर्घकालिक कचरा यह पैदा करती है, वह रेडियोधर्मी होता है और उसका उचित निपटान जरूरी है।’’  

उन्होंने कहा, ‘‘परमाणु कचरे को अलग करने, पुनर्चक्रण करने और इसे कम करने के तरीके निकालने के लिए शोध में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि थोरियम और यूरेनियम जैसे तत्व आवर्त सारणी के तत्वों के साथ कैसे अभिक्रिया करते हैं। इससे परमाणु कचरा निपटान में मदद मिल सकती है।’’