सौर बन सकती है सबसे सस्ती ऊर्जा

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जालंधर: सौर ऊर्जा विश्व के कुछ हिस्सों में कोयले से भी सस्ती ऊर्जा बन रही है। एक दशक से भी कम समय में हर स्थान पर इसका कम लागत वाले ऊर्जा के वैकल्पिक तौर पर विस्तार हो रहा है। 2016 में चिली से लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यू.ए.ई.) तक बहुत से देशों ने 3 सैट में किलोवाट-घंटा की कम लागत के साथ सौर ऊर्जा से बिजली बनाने के रिकार्ड तोड़े जो कि कोयले से बनी ऊर्जा की औसतन अंतर्राष्ट्रीय लागत का आधा था। 

अब सऊदी अरब, जॉर्डन और मैक्सिको भविष्य में कीमतें और घटाने के लिए इसकी नीलामी की योजना बना रहे हैं व इसका लाभ लेते इटली की एनलसपा और आयरलैंड की मेन स्ट्रीम रिन्युअल पावर जैसी कम्पनियां यूरोप से तजुर्बा लेती विदेशों में नया बाजार तैयार करके घरों में सौर ऊर्जा से सबसिडी की पेशकश कर रही हैं। 

2009 से सौर ऊर्जा की कीमतें सप्लाई चेन की लागत से 62 फीसदी नीचे आ गई हैं जो कि बैंक लोन और प्रीमियम खतरा घटाने के लिए निर्माण समर्था को रिकार्ड स्तर तक ले जाने तक सहायक है। आने वाले 2025 तक ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनांस के अनुसार सौर ऊर्जा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोयले से औसतन सस्ती हो सकती है। 

उद्योग जगत में बेहतर तकनीक ही मुख्य किरदार के तौर पर भूमिका निभाती हैं। सौर ऊर्जा के कारण आॢथक स्तर पर निर्माण की प्रक्रिया तेजी से हो रही है। इसका दूसरा कारण यह है कि ईंधनों के मुकाबले में सौर ऊर्जा उद्योग को नया मौका दे रही है। 2025 तक औसतन 1 मैगावाट से ज्यादा जमीन पर स्थायी सौर ऊर्जा प्रणाली से 73 प्रतिशत की लागत आएगी जो कि दूसरे विकल्पों से 1.14 डॉलर तुलनात्मक तौर पर सस्ती होगी। 

इंटरनैशनल एनर्जी एजैंसी अगले 5 सालों में औसतन 25 प्रतिशत और कम लागत की उम्मीद कर रही है। 2030 तक मौजूदा तकनीक सबसे ज्यादा फायदेमंद तकनीक मानी जाएगी जिस कारण कीमतों में 43-65 कटौती देखी जाएगी जोकि 2009 से लेकर उस समय तक 84 प्रतिशत तक हो जाएगी। बीते साल अगस्त में चिली द्वारा नीलामी में 2.91 सैंट किलोवाट-घंटा के नए ठेके लिए गए। सितम्बर महीने में यू.ए.ई. ने 2.42 सैंट किलोवाट घंटा की बोली की। डिवैल्पर्ज का मानना है कि इतनी कम लागत की बोलियों ने यह उम्मीद पैदा कर दी है कि सौर ऊर्जा की तकनीक कीमतों के कम करेगी।