‘भारत का सुपरबग सभी मौजूदा एंटीबायोटिक का प्रतिरोधी’

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वाशिंगटन/जालंधर : सुपरबग से संक्रमित एक अमरीकी महिला की मौत के बाद उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा है कि महिला अपने भारत प्रवास के दौरान सुपरबग से संक्रमित हुई थी और यह जीवाणु सभी उपलब्ध एंटीबायोटिक का प्रतिरोधी है। उच्च मृत्यु दर से जुड़े मल्टिड्रग रेसिस्टेंट संरचना कार्बापेनेम रेसिस्टेंट इंटेरोबेक्टिरियासी (सीआरई) के कारण संक्रमण हुआ।

अमेरिका के लिए सीआरई नया नहीं है लेकिन इस मामले में नया तथ्य यह है कि संक्रमण सभी उपलब्ध जीवाणु रोधी दवाओं का प्रतिरोधी है। भारत में यात्रा के बाद 70 वर्षीय मरीज को अमेरिका में एक्युट केयर अस्पताल में पिछले साल भर्ती कराया गया था। उनमें संभवत: संक्रमित दायां कूल्हा सेरोमा की वजह से सिस्टमेटिक इनफ्लेमेटरी रेस्पांस सिंड्रोम का निदान हुआ। 

संक्रमण इतना गंभीर था कि डॉक्टरों ने महिला के उपचार के लिए 14 एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया लेकिन किसी ने काम नहीं किया। क्लीबसीला निमोनिया के तौर पर चिन्हित सीआरई की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई। जख्म के नमूने को संभाव्य जांच के लिए सीडीसी भेजा गया और प्रतिरोध की संरचना का पता लगाया गया।   

जांच में नयी दिल्ली मेटालो-बेटा-लेक्टामेस (एनडीएम-एक) की मौजूदगी की पुष्टि हुई। यह एंजाइम मल्टीड्रग रेसिस्टेंट संक्रमण के उपचार के लिए एंटीबायोटिक्स की शक्तिशाली श्रेणी काबापीनेमस को सीधे तौर पर तोड़ देता है। अमरीका में वाशोई काउंटी हेल्थ डिस्ट्रिक्ट में वरिष्ठ विशेषज्ञ ली चेन ने कहा कि हम पूरे यकीन से कह रहे हैं कि वह भारत में ही सुपरबग से पीड़ित हुईं। एनडीएम की पहचान सबसे पहले 2009 में स्वीडन के एक मरीज में हुयी जिसे उपचार के लिए भारत में भर्ती कराया गया था।