खोजकारों ने खोजा कम समय में ब्लड क्लॉट घुलाने का नया तरीका

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जालंधर : शरीर के किसी भी हिस्से में चोट आने पर ब्लड क्लॉट उस जगह से रक्त के बहाव को रोकने में मदद करते हैं लेकिन अगर ये शरीर में बिना जरूरत के बनने शुरू हो जाएं तो दिल का दौरा, स्ट्रोक या अन्य गंभीर चिकित्सकीय समस्याएं आनी शुरू हो जाती हैं। इस बात पर ध्यान देते हुए रिसर्चरों ने ब्लड क्लॉट साफ करने का सबसे तेज तरीका खोज निकाला है जो इलाज के दौरान जोखिम को भी कम कर देगा। 

सबसे तेज है ब्लड क्लॉट घुलाने का यह तीसरा तरीका 

नस में ब्लड क्लॉट होने पर उसे सही करने के लिए डॉक्टरों के पास अब तक सिर्फ दो ही विकल्प थे। इन्हें घुलाने के लिए अब तक इंट्रावस्कुलर अल्ट्रासाऊंड टूल्स व टाइनी डायमंड टिप्पड ड्रिल्स का उपयोग किया जाता था लेकिन अब एक तीसरा विकल्प भी खोज निकाला गया है जो इन दोनों इलाज प्रक्रियाओं की बहुत-सी कमियों को दूर करने के साथ-साथ काफी तेज भी है। उत्तरी कारोलिना राÓय विश्वविद्यालय व चापिल हिल में स्थित उत्तरी कारोलिना विश्वविद्यालय ने साथ मिलकर पहली अल्ट्रासाऊंड ड्रिल बनाई है जो जोखिम को कम करते हुए कम समय में ब्लड क्लॉट का इलाज करने में मदद करेगी। 

ब्लड क्लॉट को छोटे टुकड़ों में काटेगी डायमंड टिप्पड ड्रिल 

इस डायमंड टिप्पड ड्रिल को नस में डालने के बाद यह ब्लड क्लॉट तक पहुंच कर उसे ग्राइंड कर छोटे टुकड़ों में काट देती है। इसके अलावा यह ड्रिल लो फ्रीक्वैंसी अल्ट्रासाऊंड से उन टुकड़ों को आगे की ओर धकेलती है तथा इसे और प्रभावी बनाने के लिए अलग से उनमें माइक्रो बबल्स को भी इंजैक्ट करती है।

डायमंड टिप्पड ड्रिल को लेकर एक लैब टैस्ट भी किया गया है, जिसमें एक गाय की नस में क्लॉट को सफलतापूर्वक घोला गया। उत्तरी कैरोलिना राÓय के पी.एच.डी. छात्र व एक पेपर के प्रमुख लेखक जिनवूक किम ने जानकारी देते हुए बताया है कि साढ़े तीन घंटे से चार घंटे के बीच 90 प्रतिशत तक इस क्लॉट को ग्राइंड किया गया है। अगर इसे मौजूदा दोनों तरीकों से किया जाता तो लगभग 10 घंटे का समय लगता। इसे बनाने वाली टीम फिलहाल अन्य पशुओं पर परीक्षण करने की तैयारी कर रही है जिसके बाद इसे इंसानों के इलाज के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा।