बुजुर्गों के लिए बनाया गया पहला ई-बाइक

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Monday, December 18, 2017-10:28 AM

सड़क पर स्थिरता बनाए रखने में करेगा मदद

जालंधर: जीवन का एक दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि जैसे ही लोगों की उम्र बढ़ती है तो उनका अपने शरीर पर से संतुलन बिगड़ जाता है जिस वजह से साइकिल चलाते समय गिरने का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसी बात पर ध्यान देते हुए बुजुर्गों के लिए पहला ई-बाइक बनाया गया है जो अपने नए डिजाइन व आधुनिक फीचर्स से रफ्तार के धीमी होने पर भी वृद्ध चालक को गिरने से बचाएगा। सोफी नामक इस ई-बाइक को तीन डच ग्रुप यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वैंटी, ई-मोबिलिटी कम्पनी इंदेस और रोइससिंह रिसर्च और डिवैल्पमैंट द्वारा विकसित किया गया है। फिलहाल इसका प्रोटोटाइप बनाया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इसका उत्पादन शुरू होगा और इसे उचित दाम पर उपलब्ध किया जाएगा। 

 

ई-साइकिल में दिए गए कमाल के फीचर्स
इसे बनाने से पहले वैज्ञानिकों ने टैस्ट कर पता लगाया है कि कम उम्र के साइकिल चालकों से वृद्ध चालकों को साइकिल चलाते समय बैलेंस बनाने में काफी समस्या होती है। इसीलिए कुछ तथ्यों पर खास ध्यान देते हुए इसे बनाया गया है। छोटे टायरों के साथ इसके व्हीलबेस को भी काफी छोटा रखा गया है जिससे सड़क पर चालक को और स्थिरता मिलती है व सीट पर बैठना व उतरना आसान हो जाता है। 

 

18 km/h की रफ्तार
इस ई-बाइक में पैंडलों को घुमाने पर इसके पीछे लगी इलैक्ट्रिक मोटर इसे बहुत ही कम समय में 18 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर पहुंचा देगी जिससे कम रफ्तार पर गिरने का खतरा नहीं रहेगा। इसमें ऑटोमैटिक सीट को लगाया गया है जो चालक के हिसाब से पोजीशन को सैट कर लेगी व स्पीड में कमी आ जाने पर अपने आप नीचे हो जाएगी जिससे वृद्ध चालक के पैर आसानी से नीचे लग जाएंगे और वह गिरने से बच जाएगा। 

 

ऑप्टीमाइज फ्रेम
इस ई-बाइक को ऑप्टीमाइज फ्रेम के तहत बनाया गया है यानी यह सड़क पर चालक की पूरी पकड़ बनाए रखने में मदद करेगा। इसके अलावा यह फ्रेम 65 से 80 वर्ष के वृद्ध चालकों को ट्रैफिक में से साइकिल को बाहर निकालने व सड़क पर खड्डा या पत्थर दिखने पर आसानी से उससे बचते हुए आगे निकलने में मदद करेगा।

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