बैटरी की क्षमता को दोगुना व सस्ता बना देगी नई तकनीक

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Monday, November 06, 2017-11:19 AM

जालंधर : रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग में लाई जाने वाली बैटरीस अब जल्द ही हल्की, छोटी व सस्ती बनाई जा सकेंगी। यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास के शोधकर्ताओं ने नए एनोड मैटीरियल को विकसित किया है जो साधारण लीथियम ऑयन बैटरी से दोगुनी पावर को स्टोर करेगा। इसके अलावा यह मैटीरियल बैटरी के साइज को छोटा बना देगा। शोधकर्ताओं का मानना है इस उपलब्धि से कम कीमत में बेहतरीन लीथियम-ऑयन बैटरीस को बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा। 

 

रंग लाई कई वर्षो की मेहनत
लिथीयम-ऑयन बैटरीस को सभी डिवाइसिस का हार्ट कहा जाता है। इनकी परफॉर्मैंस को बेहतर करने के लिए कई वर्षों की मेहनत के बाद आखिरकार शोधकर्ताओं ने सफलता हासिल की है। इस बैटरी के छोटे नमूने को शोधकर्ताओं ने इंटरडिजीटेटिड इयूटैक्टिक अलॉय से बनाया है जिसका वजन पारम्परिक एनोड मैटीरियल से तकरीबन आधा है। जानकारी के मुताबिक इसे सिर्फ दो सिम्पल स्टैप्स से बनाया गया है जिससे इन बैटरियों की मास प्रोडक्शन की जा सकती है। 

 

टैस्ट रिजल्ट्स
शोधकर्ताओं ने इस तकनीक से छोटी लीथियम-ऑयन बैटरी बना कर उस पर टैस्ट किया है जिसमें इसकी परफॉर्मैंस को बार-बार चार्ज और डिस्चार्ज कर देखा गया। इस टैस्ट के दौरान शोधकर्ताओं को बेहतरीन रिजल्ट्स प्राप्त हुए हैं, जिसके बाद इसकी कैपेसिटी को टिपिकल कोपर ग्रेफाइट एनोड से दोगुनी बताया गया है। इस तकनीक का स्मार्टफोन और लैपटॉप बनाने वाली कम्पनियों को काफी फायदा होगा। 

 

बेहतरीन परफॉर्मैंस
इस नई तकनीक को विकसित करने वाली टीम को लीड कर रहे टैक्सास मैटीरियल इंस्टीट्यूट के डायरैक्टर अरुमुगम मंथीराम ने कहा है कि इलैक्ट्रोड नैनोमैटीरियल्स को बनाने के लिए इस सस्ती, स्केलेबल प्रक्रिया विकसित कर हम काफी रोमांचक अनुभव कर रहे हैं। हमने रिजल्ट्स में पाया है कि यह मैटीरियल बेहतरीन परफॉर्मैंस दे रहा है। हमें उम्मीद है कि यह तकनीक आने वाले समय में कम कीमत में बेहतरीन डिवाइसिस बनाने में काफी काम की साबित होगी। 
 

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