आंखों का इलाज करने में सर्जन्स को मिली बड़ी उपलब्धि

Punjab Kesari

जालंधर : आंखों की बीमारियां किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती हैं। कुछ बीमारियां तो आंखों में दवाई डालने से ठीक हो जाती हैं, लेकिन कुछ के लिए गंभीर ऑप्रेशन करने की जरूरत पड़ती है जो काफी महंगा होता है। इस बात पर ध्यान देते हुए पहली बार आंख का इलाज करने में ऑई सर्जन्स की एक टीम ने बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सर्जीकल रोबोट की मदद से मरीज की मानव बाल से भी पतली रेटिना नस (retinal vein) में जमे ब्लड क्लॉट को सीधे थ्रोम्बोलीटिक ड्रग (Thrombolytic drug) इंजैक्ट कर डिसॉल्व किया है। 


रोबोट ने की सर्जरी करने में मदद -

इस सर्जीकल रोबोट को बैल्जियम की एक यूनिवॢसटी  कु ल्यूविन (KU Leuven) के शोधकत्र्ताओं ने विकसित किया है। उन्होंने इस रोबोट से दृष्टि के कम होने व अंधापन की मुख्य वजह रेटिनल वेन ओकल्सन (retinal vein occlusion) का इलाज किया है। आपको बता दें कि रेटिना नस महज 0.1 मिलीमीटर चौड़ी होती है जिस वजह से इसमें मैनुअल इंजैक्शन नहीं दिए जा सकते, लेकिन अब बिना वाइब्रेशन के काम करने वाले रोबोट की मदद से इसका इलाज किया जा सकेगा।

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इलाज में दुष्प्रभावों से होगा बचाव -

यूनिवॢसटी हास्पीटल्स ल्यूविन (University Hospitals Leuven) के ऑई सर्जन प्रोफैसर पीटर स्टालमैन्स (Professor Peter Stalmans) ने कहा है कि इस समस्या को जड़ से मिटाने के लिए यह पहला ट्रीटमैंट नहीं है, बल्कि यह मौजूदा इलाज के तरीके से काफी सस्ता हो सकता है। फिलहाल इस बीमारी का इलाज करने के लिए रोगी को मोटी रकम चुकानी पड़ती है, वहीं इस नई इलाज प्रक्रिया से इलाज सस्ता होगा व इलाज से होने वाले दुष्प्रभावों (side effects) से भी बचा जा सकेगा। 


उन्होंने कहा है कि इस रोबोटिक डिवाइस की कीमत काफी ’यादा हो सकती है, लेकिन इसने हमें रेटिना में थ्रोम्बोसिस (Thrombosis) बीमारी का इलाज करने के योग्य बना दिया है। उम्मीद की जा रही है कि इस तकनीक के सफल होने के बाद ऐसी अन्य टैक्नोलॉजिस विकसित की जाएंगी जिससे नेत्रहीनों के जीवन में भी रोशनी का उजाला होगा।