कार खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत, अब मिलेगा असली माइलेज का सच! सरकार ला रही नया नियम

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Thursday, January 22, 2026-11:32 PM

ऑटो डेस्कः कार खरीदते समय ज्यादातर लोग सबसे पहले यही पूछते हैं कि गाड़ी कितना माइलेज देगी। लेकिन अक्सर देखा गया है कि शोरूम में बताया गया माइलेज और सड़क पर मिलने वाला माइलेज एक जैसा नहीं होता, खासकर जब कार में एसी चलाया जाता है। इसी परेशानी को देखते हुए अब सरकार माइलेज टेस्टिंग के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है।

सरकार का मकसद है कि ग्राहकों को कागजों वाला नहीं, बल्कि असल जिंदगी में मिलने वाला माइलेज पता चल सके, ताकि गाड़ी खरीदते समय कोई भ्रम न रहे।

माइलेज टेस्टिंग में क्या होगा बड़ा बदलाव

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय (Union Road Transport Ministry) ने प्रस्ताव रखा है कि 1 अक्टूबर 2026 से भारत में बिकने वाली सभी पैसेंजर कारों का माइलेज टेस्ट एसी ऑन करके किया जाएगा।

अब तक ज्यादातर कंपनियां बिना एसी चलाए माइलेज टेस्ट करती थीं। वही आंकड़े ब्रॉशर और वेबसाइट पर दिखाए जाते थे, असल ड्राइविंग में माइलेज कम निकलता था। नए नियम के तहत कार का एसी चालू रहेगा और उसी हालत में फ्यूल एफिशिएंसी मापी जाएगी। इससे ग्राहकों को ज्यादा वास्तविक और भरोसेमंद माइलेज डेटा मिलेगा।

AIS 213 स्टैंडर्ड के अनुसार होगा टेस्ट

ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, M1 कैटेगरी यानी सभी पैसेंजर कारों का माइलेज टेस्ट अब AIS 213 स्टैंडर्ड के तहत किया जाएगा। आज के समय में भारत जैसे गर्म देश में बिना एसी गाड़ी चलाना लगभग नामुमकिन है। इसलिए यह नया नियम ग्राहकों के रोजमर्रा के अनुभव के ज्यादा करीब होगा।

ऑटो कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी

एसी ऑन माइलेज टेस्ट लागू होने से कंपनियां सिर्फ लैब के आंकड़े नहीं दिखा पाएंगी। विज्ञापनों में ज्यादा ईमानदार जानकारी देनी होगी और ग्राहकों को अलग-अलग कारों की सही तुलना करने में मदद मिलेगी। फिलहाल सरकार ने इस ड्राफ्ट नियम पर 30 दिनों तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं, इसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

माइलेज के साथ सेफ्टी पर भी सरकार की सख्ती

सरकार सिर्फ माइलेज ही नहीं, बल्कि कारों की सुरक्षा (सेफ्टी) को लेकर भी नियम सख्त करने की तैयारी में है। Bharat NCAP 2 के तहत नए सेफ्टी नियम 1 अक्टूबर 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है। अब तक सेफ्टी रेटिंग सिर्फ क्रैश टेस्ट पर आधारित होती थी अब सेफ्टी को कई अलग-अलग पहलुओं से परखा जाएगा।

अब इन 5 पैमानों पर होगी कारों की सेफ्टी रेटिंग

नई व्यवस्था के तहत कारों को इन पांच बिंदुओं पर आंका जाएगा:

  1. क्रैश प्रोटेक्शन (टक्कर में सुरक्षा)

  2. पैदल यात्रियों की सुरक्षा

  3. सेफ ड्राइविंग फीचर्स

  4. क्रैश अवॉयडेंस (हादसे से बचाव)

  5. हादसे के बाद की सुरक्षा

यह सिस्टम काफी हद तक यूरोपियन सेफ्टी स्टैंडर्ड जैसा होगा।

पैदल यात्रियों और दोपहिया सवारों को मिलेगा खास महत्व

सरकार पहली बार पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को रेटिंग में शामिल कर रही है। VRU (Vulnerable Road Users) यानी पैदल यात्री, साइकिल और बाइक सवार इनकी सुरक्षा को कुल सेफ्टी रेटिंग में 20% वेटेज देने का प्रस्ताव है। यह फैसला भारतीय सड़कों की हकीकत को देखते हुए लिया गया है, जहां सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं लोगों को होता है।

अब तक माइलेज में क्यों होता था इतना फर्क?

अब तक कंपनियां यूरोपीय मानकों के अनुसार बिना एसी माइलेज टेस्ट करती थीं जबकि भारत में गर्मी ज्यादा होती है, एसी चालू होते ही माइलेज कम हो जाता है। यहीं से कंपनी के दावे और ग्राहकों के असली अनुभव के बीच बड़ा अंतर पैदा होता था। नया नियम लागू होने के बाद यह फर्क काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।


Edited by:Pardeep

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