अभी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं Self-driving cars : स्टडी

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Monday, January 28, 2019-3:14 PM

ऑटो डेस्कः दुनिया की तमाम मशहूर कार निर्माता कंपनियां अब सेल्फ ड्राइविंग कारों को लाने के लिए काम कर रही हैं। लेकिन अभी इन कारों को लाने में सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से यह काम करती हैं, वह पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का कहना है कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जो मॉडल विकसित किए हैं, वे वर्चुअल स्पॉट्स को तो पकड़ सकते हैं, लेकिन वो वास्तविक मानवीय गतिविधियों की पूरी तरह पहचान कर पाने में अभी समर्थ नहीं हैं। ये मॉडल सड़क पर दौड़ रही एम्बुलेंस और इससे मिलती-जुलती गाड़ी की अलग-अलग पहचान नहीं कर सकती है।

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पूरी तरह सेफ नहीं
यही कारण है कि रिसर्चर्स ने ड्राइवरलेस व्हीकल्स को पूरी तरह सेफ नहीं माना है। ऐसे व्हीकल्स अभी पूरी तरह परिस्थितियों की पहचान नहीं कर सकती हैं और सही रिस्पॉन्स नहीं कर पाती हैं। यह कुछ संभावित परिस्थितियों के कैलकुलेशन और स्पॉट पैटर्न को ही समझ सकती हैं, पर अलग स्थितियों में पूरी तरह सेफ नहीं मानी जा सकतीं। किसी खास समय के दौरान इनकी कोई गतिविधि अगर 90 पर्सेंट सही हो सकती है, तो वहीं कुछ ऐसी मिस्टेक भी हो सकती है जिस पर इनका कोई नियंत्रण नहीं हो सकता। 

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अभी है और टेस्ट की जरूरत
यही कारण है कि यह टेक्नोलॉजी अभी इस लेवल पर नहीं आ सकी है कि सेल्फ ड्राइविंग कारों को सड़कों पर उतारा जा सके। वैज्ञानिकों ने अभी इनमें वीडियो गेम्स को लेकर ही टेस्टिंग की है। माइक्रोसॉफ्ट और और एमआईटी का कहना है कि इन्हें लेकर अभी और टेस्ट किए जाने की जरूरत है। इनका कहना है कि पहले आई सेल्फ ड्राइविंग कारें सड़कों पर बर्फ जैसी चीजों की पहचान भी नहीं कर पा रही हैं। जहां तक हैवी ट्रैफिक में इन कारों के चलने का सवाल है, इसके खतरों के बारे में अभी सोचा भी नहीं जा सकता।


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