अब भारत में लोकली स्टोर करना पड़ेगा यूजर का डाटा!

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Friday, August 10, 2018-9:48 AM

- टैक्नोलॉजी कम्पनियों को लगेगा झटका

- देश की सुरक्षा को लेकर उठाया गया अहम कदम

जालंधर : देश में नागरिकों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सरकार ने अहम कदम उठाया है। अब आने वाले समय में सभी टैक दिग्गज कम्पनियों को भारत में लोकली डाटा सेव करना पड़ सकता है। इससे अमेजॉन, IBM और  माइक्रोसॉफ्ट के प्रभावित होने की सम्भावना है, वहीं गूगल, ओरेकल, फेसबुक व इसकी मैसेजिंग सर्विस व्हाट्सएप पर भी इसका काफी असर पड़ेगा।  फिलहाल ये कम्पनियां यूजर के डाटा को दूसरे देशों में स्टोर करती हैं लेकिन सरकार अब चाहती है कि इसे भारत में स्टोर किया जाए ताकि डाटा पर नजर रखी जा सके। सरकार का एक पैनल क्लाऊड कम्प्यूटिंग पालिसी पर काम कर रहा है जो डाटा को भारत में ही जैनरेट करने व यहां ही स्टोर करने की अनुमति प्रदान करेगा। 

- ऑनलाइन न्यूज वैबसाइट रिऊटर्स का कहना है कि उसने इस नई पालिसी से जुड़ी ड्राफ्ट रिपोर्ट को देखा है जिसमें दी गई प्रपोजल से टैक्नोलॉजी दिग्गजों को झटका लगेगा। इसमें लिखा है कि भारत का डाटा भारत में ही स्टोर किया जाएगा।  रिपोर्ट के मुताबिक इससे न सिर्फ टैक्नोलॉजी कम्पनियों की कास्ट बढ़ेगी बल्कि उन्हें भारत में अपने डाटा स्टोरेज सैंटर्स में भी बढ़ौतरी करनी पड़ेगी। वहीं बिजली की लागत भी बढ़ जाएगी। 

देश की बढ़ेगी सुरक्षा

डाटा सैंटर्स को भारत में लगाए जाने पर भारतीय ग्राहकों के डाटा को सरकार की निगरानी में ही पास किया जाएगा। इस पॉलिसी के तहत छोटी स्टार्टअप कम्पनियों से लेकर बड़ी साइज की इंडियन कम्पनियों का डाटा भारत में स्टोर होगा। फिलहाल पूरे डाटा को भारत में ही स्टोर किया जा सके, इससे जुड़ी पॉलिसी की प्रपोजल को प्रैजैंट किया गया है।

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इन्वैस्टीगेशन में हो रही समस्या

अथोरिटीज का कहना है कि इस इंफार्मेशन को लोकली स्टोर किया जाए ताकि इनवैस्टीगेशन के लिए आसानी से इसे एक्सैस किया जा सके। इसे वैश्विक जांच करने के लिए व इस बात का पता लगाने के लिए लाया जा रहा है कि कम्पनियां डाटा को आखिरकार स्टोर कैसे करती हैं। अभी तो फिलहाल कम्पनियों के डाटा सैंटर्स अन्य देशों में लगे हैं जहां से डाटा प्राप्त करना काफी मुश्किल है। 

डाटा प्रोटैक्शन को लेकर आगे की सोच रहा भारत

क्लाऊड पॉलिसी पैनल की इस ड्राफ्ट रिपोर्ट को इंडियन टैक जाएंट इनफोसिस के को-फाऊंडर क्रिस गोपालकृष्णन द्वारा लीड किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि डाटा प्रोटैक्शन को लेकर हम काफी आगे की सोच रहे हैं ताकि भारत के IT लार्ज फ्रेमवर्क को और बेहतर किया जा सके जो फिलहाल क्लाऊड कम्प्यूटिंग के लिए अपर्याप्त है।

भारत में होना चाहिए डाटा स्टोर

हम सिफारिश कर रहे हैं कि क्लाऊड डाटा व किसी भी तरह के डाटा को जो इंडिया में जैनरेट हुआ है उसे देश के भीतर ही सेव किया जाए जिससे इनवैस्टीगेशन एजैंसीज व नैशनल सिक्योरिटी एजैंसीज के लिए हर समय यह उपलब्ध रहे। फिलहाल गोपालकृष्णन ने इस ड्राफ्ट रिपोर्ट को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन इतना जरूर बताया है कि उन्हें उम्मीद है कि इस पालिसी को इंफार्मेशन टैक्नोलॉजी मिनिस्टर को इस महीने के अंत तक या 15 सितम्बर से पहले-पहले सबमिट कर दिया जाएगा। 

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क्या है क्लाऊड कम्प्यूटिंग

आपको बता दें कि क्लाऊड कम्प्यूटिंग से ग्राहकों तक सॉफ्टवेयर, स्टोरेज और अन्य सर्विसेज को रिमोट डाटा सैंटर्स के जरिए उपलब्ध किया जाता है। उद्योग के अधिकारियों ने कहा है कि भारतीय कारोबार अपने डाटा को क्लाऊड सर्विसेज के जरिए ही स्टोर करते हैं। यह देश के बाहर स्टोर होता है जिससे भारत को इस डाटा को प्राप्त करने में समस्या होती है। 

भारतीयों को होगा लाभ 

सरकार का कहना है कि इंडियन लीगल और पालिसी फ्रेमवक्र्स के मुताबिक भारत में जैनरेट किए गए डाटा को भारतीय नागरिकों के लाभ के लिए उपयोग किया जा सकेगा। 


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