भारतीय अमरीकी किशोर ने किया कान की सस्ती मशीन का आविष्कार

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Wednesday, April 13, 2016-10:58 AM

जालंधर: भारतीय मूल के 16 वर्षीय अमरीकी लड़के ने सुनने में मदद करने वाली एक सस्ती मशीन (हियरिंग एेड) बनाई है। 60 डॉलर की यह मशीन उन लोगों के लिए मददगार साबित हो सकती है, जो महंगी मशीनें नहीं खरीद सकते।  

कंटुकी के लुइविल शहर के निवासी मुुकुंद वेंकटकृष्णन ने इस मशीन पर दो साल तक काम किया और जेफरसन काउंटी पब्लिक स्कूल्स आइडिया फेस्ट में इसे पेश किया। हाल ही में उन्होंने इस मशीन के लिए केंटुकी स्टेट साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस मशीन का इस्तेमाल सस्ते हेडफोन की मदद से भी किया जा सकता है। इसमें पहले विभिन्न आवृत्तियों की आवाजें बजाकर हेडफोन के जरिए व्यक्ति की सुनने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है। इसके बाद यह अपनी प्रोग्रामिंग एक हियरिंग एड के रूप में कर लेती है। इस क्रम में यह परीक्षण के नतीजों के आधार पर आवाज बढ़ा देती है।  

डूपोंट मैनुअल हाई स्कूल के छात्र मुकुंद ने कहा, ‘‘यह एक डॉक्टर की जरूरत को खत्म कर देता है। वास्तव में यह एंप्लीफायर (ध्वनि संवर्धक) है। आपको जितना उंचा सुनता है, उसके हिसाब से आवाज बढ़ा लीजिए। इसके लिए 1500 डॉलर तक लिए जाते हैं, जबकि आप 60 डॉलर में एेसा कर सकते हैं।’’  

उन्होंने बताया कि आने वाले किसी सिगनल की आवाज बढ़ाने के लिए जरूरी प्रोसेसर ही इसका सबसे महंगा हिस्सा है। यह 45 डॉलर का पड़ता है। बाकी हिस्सों की कीमत लगभग 15 डॉलर है। इस मशीन को बनाने की प्रेरणा मुकुंद को दो साल पहले मिली थी, जब वह अपने दादा-दादी से मिलने भारत गए थे। उन्हें अपने दादा का परीक्षण करवाने और सुनने की मशीन लेने में मदद करने का काम दिया गया था। मुकुंद ने इस महंगी और मुश्किल प्रक्रिया को देखकर इसका विकल्प तलाशने का संकल्प लिया।

 

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