टेक कंपनियों की रिपोर्ट : पिछले साल इतने करोड़ बच्चों की अश्लील फोटो और वीडियो देखी गई इंटरनेट पर

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Tuesday, October 1, 2019-12:16 PM

गैजेट डेस्क : इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी एक गंभीर समस्या बन चुकी है जिसके चलते हज़ारो नहीं करोड़ो बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियोज़ प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। इस समस्या पर बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के दावों के इतर इनकी चाइल्ड पोर्न कंटेंट की अपलोडिंग पर कोई रोकथाम नहीं है। अब गूगल , फेसबुक और ट्विटर ने अपनी एक रिपोर्ट साझा की है जिसमें खुलासा हुआ है कि पिछले वर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बच्चो की अश्लील फोटो और वीडियो इंटरनेट पर डाली और देखी गई है। इन फोटोज़ और वीडियोज़ में तीन से चार साल के मासूम बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया गया है। 

 

10 साल पहले थी चाइल्ड पोर्न कंटेंट की यह परिस्थिति

 

 

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टेक कम्पनियो की चौंका देने वाली रिपोर्ट में पिछले दशक और आज की इंटरनेट परिस्थिति में तुलना की गई है। इस रिपोर्ट में खुलासा है कि 10 साल पहले चाइल्ड पोर्न से सम्बंधित ऐसे वीडियोज़ और फोटोज़ की संख्या केवल 10 लाख थी। साल 2008 में इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका की संसद में कानून बनाया गया था। 

 

अमेरिकी समाचार पत्रिका नन्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार तमाम टेक कंपनियों अपने दावों से उलट चाइल्ड पोर्नोग्राफी रोकने में पूरी तरीके से नाकाम रही हैं। अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट में इस इस तरह के आपराधिक मामलो के लिए कोई अधिकारी ही नहीं है जबकि भारत में पोस्को एक्ट के तहत चाइल्ड पोर्न पर कार्यवाही की जाती है। इसको लेकर इसी वर्ष संसद में केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस कानून में संशोधन कर चाइल्ड पोर्न कंटेंट को जोड़ा था और अगस्त में इसे संसद में बिल पास कर दिया गया था। 

 

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इस रिपोर्ट में कुछ अन्य अहम खुलासे भी हुए हैं। चाइल्ड पोर्न कंटेंट को स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के ज़रिये तेज़ी से फैलाया जा रहा है। यह अश्लील फोटो पहले वेबसाइट तक ही सिमित थी लेकिन अब यह ट्विटर , इंस्टाग्राम और यहाँ तक की मैसेंजर प्लेटफॉर्म तक अपनी पहुँच बना चुकी है। फेसबुक ने इसी साल अपने मैसेंजर प्लेटफार्म पर इनका इन्क्रिप्शन करने की बात कही है। वास्तव में यदि आप गूगल में डायरेक्ट सर्च कर्नेगे तो आपको मिला फ़िल्टर किये पोर्न कंटेंट मिल जायेगा जो कि बिंग जैसे फिल्टर्ड सर्च इंजन पर देखने को नहीं मिलेगा। 

 

साल 1998 में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े तीन हज़ार मामले दर्ज़ किये गए थे जबकि 10 साल बाद 2008 में यह संख्या 1 लाख का आंकड़ा पार कर गई और 2014 में इन दर्ज़ मामलो की संख्या 10 लाख के पार जा पहुँची। 


 


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