खोज और बचाव कार्य के लिए NASA ने बनाया मानव रहित ड्रोन

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Friday, June 15, 2018-12:34 PM

- जगह की निगरानी करने में मिलेगी मदद

जालंधर : अमरीकी स्पेस एजैंसी NASA ने खोज और बचाव कार्य के दौरान लोगों की सहायता के लिए एक ऐसा मानव रहित ड्रोन बनाया है जो जगह का मुआयना करते हुए लोगों को मदद प्रदान करेगा। रिमोट के जरिए काम करने वाले इस बड़े आकार के ड्रोन को इकहाना एयरक्राफ्ट नाम दिया गया है। कैलिफोर्नियां के एडवर्ड एयर फोर्स बेस से इसे पहली बार उड़ाया गया है और इस दौरान इसने सफलतापूर्वक उड़ान को अंजाम दिया है। 

 

जंगल की आग से लडने में मिलेगी मदद

नासा ने प्रैस रिलीज़ जारी कर बताया है कि यह मानव रहित ड्रोन जंगल की आग से लड़ने में मदद करेगा। इसके जरिए आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि किस ओर आग लगी है व कितनी तेजी से बढ़ रही है। सर्च ऑप्रेशन के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों का पता लगाने में इससे मदद मिलेगी। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर सामान को लोगों तक पहुंचा कर उनकी जिंदगी बचाने में भी यह काफी सहायक साबित होगा। 

 

विमान की तरह ही उड़ाया गया यह ड्रोन

एडवर्ड एयरफोर्स बेस से इसे बिल्कुल उसी प्रकार उड़ाया गया जैसे कि एक विमान को उड़ाया जाता है। ज्यादातर समय इसे 10,000 फीट (लगभग 3,000 मीटर) की ऊंचाई पर उड़ाया गया वहीं इसने अधिकतम  20,000 फीट (लगभग 6,000 मीटर) की ऊंचाई तक पहुंच बनाई। इस पूरे समय में लास एंजल्स एयर ट्रैफिक कन्ट्रोल सैंटर व ओकलैंड एयर रूट ट्रैफिक कन्ट्रोल सैंटर ने इसकी निगरानी की। 

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उड़ान भरने से पहले ली गई मंजूरी

इस बड़े आकार वाले ड्रोन को उड़ाने से पहले नासा को अमरीकी संघीय विमानन प्रशासन से एक स्पैशल सर्टीफिकेट की मंजूरी लेनी पड़ी जिसके बाद इस पर सफलतापूर्वक टैस्ट किया गया। 

 

उन्नत तकनीक से बनाया गया यह ड्रोन

इकहाना ड्रोन में जनरल ऐटोमिक्स एयरोनोटिकल सिस्टम, एयरबोर्न राडार, हनीवैल ट्रैफिक अलर्ट और कलिजन अवॉइडैंस सिस्टम दिया गया है। इसके अलावा इसमें ऑटोमैटिक सर्विलेंस ब्रॉडकास्ट सिस्टम भी लगा है जो ड्रोन की पोजीशन को सैटेलाइट के जरिए डिटैक्ट करने में मदद करता है।

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ड्रोन में दी गई नई टैक्नोलॉजी 

संचार की उन्नत तकनीक के इस्तेमाल के अलावा इसमें खास टैक्नोलॉजी दी गई है जो हवा में उड़ते समय इसके रास्ते में आने वाली किसी भी चीज़ जैसे पक्षी आदि का पता लगा कर ड्रोन को उसके साथ टकराने से बचाती है जिससे दुर्घटना होने की सम्भावना कम हो जाती है। 

 

पायलट्स के साथ शेयर की गई जानकारी

नासा का कहना है कि रिमोट के जरिए ग्राऊंड से ही इसे उड़ाने पर वही अनुभव मिलता है जैसा कि एक विमान के कॉकपिट में बैठने पर पायलट को मिलता है। उड़ान की पूरी जानकारी को कमप्शियल व प्राइवेट पायलट्स के साथ शेयर किया गया है। सफल परीक्षण के बाद माना जा रहा है कि सिविल सर्विस उद्देश्यों के लिए आने वाले समय में बड़े आकार वाले ड्रोन्स का काफी उपयोग किया जाएगा। 


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