आपका स्मार्टफोन कर रहा आपकी जासूसी

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Monday, July 9, 2018-11:32 AM

- खतरे में हैं पास-वर्ड व क्रैडिट कार्ड नम्बर्स

चोरी छिपे थर्ड पार्टीका तक पहुंच रही संवेदनशील जानकारी

 

जालंधर : सस्ते एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स द्वारा प्रीलोडेड एप्स से यूजर की जानकारी को इक्ट्ठा करने की खबरों के बाद अब एक नई हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। नई स्टडी से पता चला है कि स्मार्टफोन में मौजूद कुछ लोकप्रिय एप्स आपकी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं और आपके द्वारा किसी भी एप को चलाने पर चुपके से स्क्रीन शॉट्स क्लिक कर थर्ड पार्टीका को सैंड कर रही हैं। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्चर्स का कहना है कि आपकी एक्टिविटी के क्लिक किए गए स्क्रीनशॉट्स में आपका नाम, पासवर्ड्स, क्रैडिट कार्ड नम्बर्स और अन्य निजी जानकारी हो सकती है। यानी आपकी संवेदनशील जानकारी अब खतरे में है।


स्क्रीन एक्टिविटी का पता लगा रहीं एप्स

अमरीकी राज्य मैसाचुसेट्स की बोस्टन नार्दर्न यूनिवॢसटी के प्रोफैसर (डेविड चोफनैस) ने कहा है कि हमने पता लगाया है कि हर एप आपकी स्क्रीन पर क्या हो रहा है उसे रिकार्ड कर सकती है और आप जो टाइप करते हैं उसके बारे में पता लगा सकती है। बाॢसलोना में आयोजित हुई प्राइवेसी एन्हासिंग टैक्नोलॉजी सिम्पोजियम कॉन्फ्रैंस के दौरान इससे जुड़ी पूरी जानकारी दी गई। 

 

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17,000 एप्स रख रहीं आप पर नकार

इस स्टडी के दौरान रिसर्चर्स की टीम ने पता लगाया है कि 17,000 से ज्यादा प्रभावित एप्स को लोग एंड्रॉयड ऑप्रेटिंग सिस्टम पर काफी मात्रा में उपयोग करते हैं। इन्हें छात्रों द्वारा बनाए गए ऑटोमैटिड टैस्ट प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है। इनमें से 9,000 एप्स यूजर की एक्टिविटी के स्क्रीनशॉट्स क्लिक कर रही हैं।

 

यूनिवर्सिटी के प्रोफैसर क्रिस्टो विल्सन ने बताया है कि किसी भी तरह की ऑडियो लीक नहीं हुई है और किसी भी एप में माइक्रोफोन एक्टिवेट नहीं था लेकिन हमें उम्मीद नहीं थी कि एप्स ऑटोमैटिकली स्क्रीनशॉट्स क्लिक कर थर्ड पार्टी तक पहुंचा रही हैं। इससे यूजर की गोपनीयता का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा है कि लाभ के लिए किसी फोन की गोपनीयता का कितनी आसानी से उपयोग किया जा रहा है। 


विल्सन ने कहा है कि जाहिर है कि इस जानकारी का उपयोग दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और सबसे परेशान करने वाली बात तो यह है कि उपयोगकर्ताओं द्वारा कोई नोटिफिकेशन या परमिशन के बिना ऐसा हो रहा है। रिसर्चर्स ने कहा है कि फिलहाल इस स्टडी को एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स पर किया गया है लेकिन अब यह मानना मुश्किल है कि अन्य ऑप्रेटिंग सिस्टम भी सेफ होंगे। 


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