दिमाग के अंदर इंसर्ट होगी रोबोटिक चिप, पैरालाइज़ व्यक्तियों के लिए वरदान है नई टैक्नोलॉजी

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Wednesday, July 17, 2019-6:31 PM

- बिना हाथ हिलाए कर सकेंगे कम्प्यूटर व स्मार्टफोन का इस्तेमाल

- एलोन मस्क ने किया ब्रेन इम्पलाएंट रोबोटिक डिवाइस का खुलासा

गैजेट डैस्क : मरीजों की समस्याओं पर ध्यान देते हुए SpaceX और Tesla कम्पनी के CEO एलोन मस्क ने महत्वपूर्ण घोषणा की हैं। उनका कहना है कि अमरीकी न्यूरोटैक्नोलॉजी कम्पनी Neuralink ब्रेन मशीन इंटरफेसिस तैयार कर रही है। यह एक ऐसी रोबोटिक डिवाइस होगी जो पैरालाइज़ व्यक्तियों को बिना हाथ हिलाए स्मार्टफोन और कम्पयूटर का इस्तेमाल करने में मदद करेगी। 

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USB से ट्रासमिट होगा डाटा

एलोन मस्क के मुताबिक उनकी कम्पनी न्यूरालिंक ने एक कस्टम चिप तैयार की है जो आसानी से दिमाग को रीड करती है। यह इम्पलाएंट रोबोटिक डिवाइस डाटा को सिर्फ एक वायर्ड कनैक्शन (USB-C) से ट्सरामिट करती है। नई तकनीक की मदद से जितने समय में आप बोल कर या इशारे से बात समझाते हैं इतने ही समय में बात कम्प्यूटर के जरिए समझी जा सकेगी।

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USB से कम्पयूटर में सिग्नल भेजने वाली चिप

 

चूहों पर शुरू हुई टैस्टिंग

फिलहाल कम्पनी इस तकनीक को चूहों पर टैस्ट कर रही है, जिसके बाद इसे रोबोट सर्जरी के जरिए इंसानी दिमाग में इंसर्ट किया जाएगा। कम्पनी कुल मिला कर चार N1 सैंसर्स फिट करेगी। वहीं एक डिवाइस को कान के पीछे लगाया जाएगा जिसमें बैटरी लगी होगी। इस डिवाइस को आईफोन एप से कन्ट्रोल किया जा सकेगा। 

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लैबोरेटरी में चूहे के सिर में फिट किया गया Neuralink’s ब्रेन इम्पलाइंट सिस्टम

 

बालों से भी छोटी तारों का किया गया इस्तेमाल

सबसे बड़ी अडवांटेज है कि इस डिवाइस को लचीले पदार्थ से बनाया गया है और इनमें लगी धागों जैसी तारों का आकार इंसानी बाल से भी छोटा है जिन्हें थ्रैड्स कहा जा रहा है। इससे यूजर को किसी भी तरह का नुक्सान नहीं होगा। इसके अलावा बहुत ही तेजी से डाटा को ट्रासफर किया जा सकेगा। 

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N1 Sensor की तस्वीर

 

अगले साल मानव रोगी के लिए शुरू होगा इस्तेमाल

मस्क ने कहा है कि इस तकनीक पर सबसे पहले एक्सपैरिमेंट स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइटिंस्ट्स करेंगे। हमें उम्मीद है कि इसको अगले साल के आखिर तक मानव रोगी के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। 

  • उन्होंने बताया कि फिलहाल मानव पर इस नई तकनीक को लेकर किस तरह के परिणाम आएंगे इसके बारे में तो अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन माना जा रहा है कि हम AI यानी आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस तकनीक की मदद से खोपड़ी को पार करते हुए दिमाग तक पहुंचेगे और रीड कर पाएंगे कि इंसान क्या सोच रहा है। 

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इस मशीन से दिमाग में डाली जाएगी चिप

 

  • आपको पता दें कि मैथ्यू नागले दुनिया का पहला पैरेलाइज्ड व्यक्ति है जिसके दिमाग में ब्रेन इम्पलाएंट के जरिए डिवाइस डाली गई थी जिसके बाद वे बिना हाथ हिलाए दिमाग से ही कम्पयूटर करसर चलाने में कामयाब हो गए थे। वर्ष 2006 में उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी जिसके बाद वे सिर्फ अपने दिमाग से ही टेबल टैनिस स्पोर्ट गेम 'Pong' खेलते थे। सिर्फ 4 दिनों में ही उन्होंने बेसिक मूवमेंट्स को सीख लिया था। ऐसे में अब इस इलाज को आम मरीजो तक पहुंचाने के लिए कोशिश की जा रही है। 

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