लोकल न्यूज को बढ़ावा देगी फेसबुक, खर्च करेगी 300 मिलियन डॉलर

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Wednesday, January 16, 2019-5:05 PM

गैजेट डेस्कः पिछले कुछ वर्षों से न्यूज वर्ल्ड में फेसबुक की भूमिका बढ़ती जा रही है। दुनिया भर में फेसबुक न्यूज शेयरिंग के एक बड़े प्लेटफॉर्म के रूप में सामने आया है। लेकिन इसके साथ ही फेसबुक पर फेक न्यूज और गलत जानकारी को बढ़ावा देने के आरोप भी लगते रहे हैं, क्योंकि न्यूज कंटेंट की सच्चाई को परखने का इसके पास कोई तरीका नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में सबसे पॉपुलर फेसबुक ने शायद इसी वजह से मीडिया से अपने कॉन्टैक्ट्स और लोकल न्यूज में अपनी पार्टनरशिप को बढ़ाने के लिए प्लान बनाया है। जानकारी के मुताबिक, फेसबुक इसके लिए 300 मिलियन डॉलर खर्च करने जा रही है। 

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लोकल न्यूज में बढ़ाएगी पैठ
जानकारी के मुताबिक, फेसबुक पुलित्जर सेंटर, रिपोर्ट फॉर अमेरिका, नाइट-लेनफेस्ट न्यूज ट्रांसफॉर्मेशन फंड, लोकल मीडिया एसोसिएशन, लोकल मीडिया कन्सोर्टियम, अमेरिकन जर्नलिज्म प्रोजेक्ट, और कम्युनिटी न्यूज प्रोजेक्ट के बीच 16 मिलियन डॉलर डिस्ट्रिब्यूट करेगी, ताकि लोकल न्यूज में उसकी पैठ बढ़ सके और उसे ऑथेंटिक इन्फॉर्मेशन मिल सके। 

फर्जी खबरों पर लगाएगी लगाम
फेसबुक ने मंगलवार को कहा कि वह अमेरिका में न्यूज रूम की मदद और विदेशों इसका कमर्शियल मॉडल बनाने की योजना के विस्तार के लिए यह इन्वेस्टमेंट करने जा रही है। फेसबुक के ग्लोबल न्यूज पार्टनरशिप के वाइस प्रेसिडेंट कैम्पबेल ब्राउन ने एक बयान में कहा, "हम फेसबुक पर फर्जी खबर, गलत सूचना और कम गुणवत्ता वाली खबरों को जारी नहीं रखेंगे और उन पर लगाम लगाएंगे, लेकिन लोकल न्यूज ऑर्गनाइजेशन्स को बढ़ाने में मदद करने की हमारी जिम्मेदारी है।"

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1,000 जनर्लिस्ट्स की भर्ती करेगी फेसबुक
फेसबुक की योजना अमेरिका में लोकल रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड न्यूज को बढ़ावा देने और नए न्यूज को बेहतर बनाने के लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के यूज में मदद करने की है। फेसबुक ट्रेनी कम्युनिटी जनर्लिस्ट की भर्ती करेगी और उन्हें लोकल न्यूज कवरेज करने और किसी प्रोग्राम के लिए फंड जुटाने में भी मदद करेगी। फेसबुक की योजना पांच वर्षों के भीतर लोकल न्यूज रूम्स में 1,000 जर्नलिस्ट्स की भर्ती करने की भी है।

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प्यू की स्टडी में हुआ खुलासा
हाल में ही एक स्टडी से पता चला है कि 2004 से 1,800 लोकल न्यूज पब्लिकेशन बंद हो चुके हैं। बहरहाल, फेसबुक और गूगल जैसे डिजिटल ऐड देने वालों पर यह भी आरोप लगा है कि जर्नलिज्म के डाउनफॉल के लिए ये भी जिम्मेदार हैं। पिछले साल, प्यू की एक स्टडी में यह खुलासा हुआ कि सोशल मीडिया ने अमेरिका में पॉपुलर न्यूज सोर्स के फॉर्म में बदलाव ला दिया था। फेसबुक ने पिछले साल अपने न्यूज फीड में लोकल न्यूज प्रोवाइडर्स को टक्कर देना शुरू कर दिया था।
 


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