आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस तकनीक से ठीक होगी रीढ़ की हड्डी की चोट

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Friday, October 4, 2019-6:19 PM

गैजेट डैस्क: आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल अब मरीजों के इलाज में भी होगा। हाल ही में कंप्यूटर प्रोसेसर बनाने वाली अमरीकी कंपनी इंटैल ने इंटैलिजेंट स्पाइन इंटरफेस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। इससे रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कोर्ड) में लगी गंभीर चोट से लकवाग्रस्त होने वाले मरीजों को विशेष रूप से लाभ होगा।

हर साल 17000 मरीज पहुंचते हैं अस्पताल
इस तकनीक का इस्तेमाल कर शरीर के निचले वाले हिस्से की मूवमेंट और ब्लैडर को नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। द नैशनल स्पाइनल कोर्ड इंजरी स्टैटिस्टिकल सैंटर के मुताबिक, अमरीका में स्पाइनल कोर्ड की चोट से प्रभावित 291,000 रोगी हैं। तकरीबन हर वर्ष 17000 से ज्यादा स्पाइनल कोर्ड की चोट के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं।

कैसे काम करेगी यह तकनीक:
दो वर्षों तक चलने वाले इस प्रौजेक्ट में शोधकर्ता रीढ़ की हड्डी से आने वाले सिंगनल का डाटा रिकार्ड करेंगे। इसके डैमैज स्पाइनल कोर्ड से कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क (न्यूरल नेटवर्क) से सिग्नल्स को कैसे स्टीम्यूलेट करें, यह शोध करेंगे। वहीं, सर्जन को इंटैलिजेंट बाइपास तकनीक के जरिए चोट के दोनों सिरों पर इलेक्ट्रोड इम्पलांट करने में भी मदद मिलेगी। इस काम को अंजाम देने के लिए शोधकर्ता इंटेल के AI ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर nGraph और इंटैल के AI एसलरेटर हार्डवेयर का उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं।

क्यों मायने रखती है यह तकनीक:
रीढ़ की हड्डी की चोट खतरनाक होती है। चोट गंभीर होने पर शरीर के निचला हिस्से के अंग काम करने बंद कर सकते हैं। स्पाइनल कोर्ड डैमेज होने पर शरीर खुद नर्व फाइब्रस को उत्तपन्न नहीं कर सकता। इससे दिमाग के इलैक्ट्रिकल कमांड्स (संदेश) मांसपेशी तक नहीं पहुंच पाते। इससे शरीर के निचले हिस्से में लकवा होने की संभवाना बढ़ जाती है।
 


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