फेसबुक यूजर्स के लिए बड़ी खबर, टारगेटेड ऐड को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

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Thursday, January 17, 2019-3:14 PM

गैजेट डेस्कः फेसबुक पर एडवर्टिजमेंट्स काफी आते हैं और ये उसके रेवेन्यू का एक बड़ा जरिया हैं। ये ऐड कई तरह के होते हैं। प्रोडक्ट्स के अलावा अब पॉलिटिकल ऐड के लिए भी फेसबुक का काफी यूज किया जाने लगा है, क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ी सोशल साइट है और हर तरह के लोग इस पर एक्टिव हैं। बावजूद इसके बहुत से लोगों को यह पता नहीं कि फेसबुक अपने ऐड को कैसे टारगेट करता है यानी उस पर दिए गए ऐड उन लोगों तक कैसे पहुंचते हैं, जिनके लिए वो यूजफुल हैं। हाल ही में प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिका में बड़े घोटालों, कांग्रेस की सुनवाइयों और यूजर्स की प्राइवेट पॉलिसी कंट्रोल की पॉलिसी को सामने लाने के बाद भी ज्यादातर फेसबुक यूजर यह नहीं समझ पाते कि ऐड देने वालों से जोड़ने के लिए फेसबुक उन्हें कैसे कैटेगराइज करता है। 

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यूजर्स को ज्यादा जानकारी नहीं
प्यू ने इससे जुड़े अपने सर्वे में 963 फेसबुक यूजर्स से बातचीत की। इसके बाद प्यू ने पाया कि 74 प्रतिशत लोगों को फेसबुक की एडवर्टिजमेंट कैटेगरीज के बारे में कुछ भी खास पता नहीं था। जानकारी के लिए बता दें कि यूजर्स की एक्टिविटीज के आधार पर ही विज्ञापन देने वाले लोगों के स्पेसिफिक ग्रुप को टारगेट कर ऐड देते हैं। लेकिन जब यूजर्स को यह बताया गया कि फेसबुक उन्हें कैसे क्लासिफाइड करता है, तो 51 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इसे लेकर बहुत ज्यादा नहीं जानते हैं।

कैटेगरीज को सही नहीं माना
प्यू के सर्वे में पांच में से करीब तीन लोगों ने कहा कि फेसबुक के क्लासिफिकेशन ने कुछ हद तक उनके इंटरेस्ट को सही तरीके से दिखाया है। वहीं, सर्वेक्षण में शामिल चार में से एक व्यक्ति ने फेसबुक की कैटेगरीज को सही नहीं माना। फेसबुक के क्लासिफिकेशन कुछ ऐसे टॉपिक्स को लेकर भी हैं जो पॉलिटिकल एफिलिएशन्स को दिखाते हैं और मल्टीकल्चरल पहचान से जुड़े हैं। प्यू ने पाया कि जिन लोगों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया था, उनमें से आधे से अधिक लोगों ने अपने प्रोफाइल पर अपना पॉलिटिकल एफिलिएशन जाहिर किया था, जबकि 21 प्रतिशत यूजर्स ने अपनी सांस्कृतिक पहचान जाहिर की थी।

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हो चुकी है फेसबुक की आलोचना
पिछले कुछ वर्षों में, फेसबुक ने टारगेटेड ऐड्स को बढ़ाया है। 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में फेसबुक की दखलंदाजी सामने आने के बाद उसकी बहुत आलोचना हुई। कहा गया कि इस दौरान रूसी ऑपरेटरों ने वोटर्स को टारगेट किए गए विज्ञापनों के लिए भुगतान किया। अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावों में अपनी कंट्रोवर्शियल भूमिका के लिए मार्क जकरबर्ग को काफी आलोचना का भी सामना करना पड़ा और बाद में उन्हें कांग्रेस में पेश होकर सफाई भी देनी पड़ी थी। 


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