Volkswagen की एंट्री के बाद Electric Car की रेस अभी तो शुरू ही हुई है

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Thursday, August 15, 2019-3:33 PM

ऑटो डेस्क : बेल्जियम देश के शहर ब्रुसेल्स के दक्षिणी किनारे पर जर्मनी के सबसे सफल ऑटोमेकर फॉक्सवैगन का भविष्य एक अजीबोगरीब प्रकार के कार कारखाने के अंदर आकार ले रहा है। यहाँ पर एग्जॉस्ट पाइप या ईंधन टैंक नहीं हैं। इस स्थान पर कोई स्पार्क प्लग, रेडिएटर या मैनिफोल्ड्स भी नही हैं। हालांकि फॉक्सवैगन ग्रुप की फैक्ट्री में बैटरीज है जो राफ्टर्स से अटैच्ड हैं। 

 
फॉक्सवैगन e-tron की बात 

 

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शू-बॉक्स आकार की यह बैटरी मॉड्यूल, जिनमें से प्रत्येक में एक दर्जन लिथियम-आयन सेल्स होती हैं, यहां मनुफैक्चर की गई प्रत्येक स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल के फर्श के नीचे मौजूद सात फुट लंबे इलेक्ट्रिक-बैटरी पैक और स्लंग में पैक किए जाते हैं। 

फॉक्सवैगन के लक्ज़री ऑडी ब्रांड की पहली इलेक्ट्रिक एसयूवी ई-ट्रॉन (e-tron) एक सिंगल बैटरी साइकिल पर 400 किलोमीटर (लगभग 250 मील) की दूरी तक जा सकती है। यह केवल आधे घंटे में ही रिचार्ज हो सकती है। इसका स्टाइल पारंपरिक है, इंटीरियर शानदार है और सवारी बेहद कम्फर्टेबल है। 

ई-ट्रॉन एसयूवी में फॉक्सवैगन कंपनी के लिए बेहद मायने रखती है। इसके ज़रिये कंपनी साबित करना चाहती है कि एक कार निर्माता जो कि इंटरनल कंबसशन इंजन पर विशेष रूप से निर्भर करता है जबसे इसे 82 साल पहले बनाया गया था , वह कार कंपनी ऐसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का प्रोडक्शन करेगी जिसको लोग खरीद सकते हैं और पॉलिसी मेकर जलवायु संकट से निपटने के लिए उसे मान्यता देंगे।

सफलता का मतलब है कि फॉक्सवैगन इलेक्ट्रिक कार की बिक्री में प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल जाएगा जिसमें टेस्ला शामिल हैं और चीन और सिलिकॉन वैली के नए ऑटो मेकर चैलेंजर्स को भी वह रोक पायेगी।  

 

फॉक्सवैगन के लिए विफलता का अर्थ

 

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फॉक्सवैगन के लिए विफलता का अर्थ बेहद साफ़ अपितु बेहद विकराल है। उसके 6,65,000 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जाना और $ 265 बिलियन डॉलर के वार्षिक राजस्व वाली कंपनी के लिए अंत की शुरुआत के संकेत। 

फॉक्सवैगन अकेले नहीं है। दुनिया भर में स्थापित कार निर्माता अपने बिज़नेस मॉडल को आनेवाली एक नई दुनिया के लिए अनुकूल बनाने की उम्मीद में प्रतिस्पर्धा वाली दौड़ में लगे हुए हैं जिसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पेट्रोल और डीजल व्हीकल्स की जगह लेती है। इलेक्ट्रिक कारों का उत्पादन करने के लिए कारखानों को अपग्रेड किया जा रहा है और वाहन निर्माता हर बैटरी को टेस्ट कर रहें जो उनके पास स्टॉक में है। 

इलेक्ट्रिक कारों को विकसित करने की उच्च लागत चाहिए जिसके लिए कुछ कंपनियों को भागीदारों को खोजने और दूसरों का अधिग्रहण करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। चीन और यूरोप में सख्त कार्बन एमिशन स्टैण्डर्ड को पूरा करने की आवश्यकता है, इसका मतलब है कि कंपनी के प्रबंधन अधिकारी डेट्रायट या वोल्फ्सबर्ग (वोक्सवैगन के गृहनगर की जगह) में प्रतिद्वंद्वियों के निर्माण की तुलना में बीजिंग या ब्रुसेल्स में होने बनने वाली कारों के प्रोडक्शन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

 

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जर्मन फॉक्सवैगन समूह जो पोर्श, बुगाटी, स्कोडा, लेम्बोर्गिनी और एसईएटी का मालिक है, एक कठोर परिवर्तन के साथ चुनौती के लिए बढ़ रहा है जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अद्वितीय है। कंपनी अपने लाइनअप में हर वाहन का इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड वर्जन बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में € 30 बिलियन ($ 34 बिलियन) खर्च कर रही है और यह 2028 तक 70 नए इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च करने की योजना बना रही है। 2030 के अंत तक, कंपनी का टारगेट है हर 10 कारों में से चार इलेक्ट्रिक कार मॉडल्स मार्किट में बेचने के लिए रेडी हो।  


अपने पिछले डीजल एमिशन स्कैंडल से उठकर अपने इस इलेक्ट्रिक कारों पर दांव के ज़रिये फॉक्सवैगन ऑटो जगत के इतिहास के पन्नो में नाम दर्ज़ करवाएगा या फिर एक फेलियर के तौर पर याद किया जायेगा यह तो सिर्फ वक़्त ही बताएगा। 


Edited by:Harsh Pandey

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